BNS Section 115 भारतीय न्याय संहिता, 2023 की वह धारा है जो स्वेच्छा से चोट पहुँचाने (voluntarily causing hurt) के अपराध की सजा तय करती है। यह पुरानी IPC की धारा 323 के समकक्ष है। 1 जुलाई 2024 से लागू नए आपराधिक कानूनों में यह प्रावधान आता है।
अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर या यह जानते हुए कि उसके काम से चोट लग सकती है, किसी को शारीरिक दर्द, बीमारी या कमजोरी पहुँचाई है, तो यही धारा लागू होती है। चोट साधारण (simple hurt) होनी चाहिए—गंभीर चोट (grievous hurt) होने पर अलग धाराएँ लगती हैं।
115(2) BNS का मतलब और कानूनी परिभाषा
धारा 115(1) परिभाषा बताती है:
जो कोई किसी कार्य को इस आशय से करता है कि उसके द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित की जाए, या इस ज्ञान के साथ करता है कि यह संभाव्य है कि वह उसके द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित करे, और उसके द्वारा किसी व्यक्ति की उपहति कारित करता है, वह “स्वेच्छया उपहति करता है”।
धारा 115(2) सजा बताती है:
जो कोई, धारा 122 की उपधारा (1) के अधीन उपबंधित मामले के सिवाय, स्वेच्छया उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा।
“उपहति” (hurt) का मतलब धारा 114 BNS के अनुसार शारीरिक दर्द, बीमारी या दुर्बलता है।
जरूरी तत्व (ingredients):
- इरादा (intention) या ज्ञान (knowledge) कि चोट लग सकती है।
- वास्तव में चोट लगी हो।
- चोट साधारण हो (गंभीर नहीं)।
अपवाद: गंभीर और अचानक उकसावे (grave and sudden provocation) पर चोट पहुँचाने का मामला धारा 122(1) में आता है, जहाँ सजा हल्की (1 महीने तक कारावास या ₹5,000 तक जुर्माना) होती है।
सजा क्या है?
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| कारावास | 1 वर्ष तक (सादा या कठोर) |
| जुर्माना | ₹10,000 तक |
| दोनों | दोनों भी लगाए जा सकते हैं |
न्यायालय चोट की गंभीरता, इरादे, आरोपी की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों को देखते हुए सजा तय करता है।
जमानत, संज्ञेय/असंज्ञेय और समझौता
BNSS की प्रथम अनुसूची के अनुसार:
- असंज्ञेय (Non-cognizable): पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के गिरफ्तारी या जाँच नहीं कर सकती।
- जमानतीय (Bailable): जमानत अधिकार के रूप में मिलती है। थाने से या न्यायालय से आसानी से मिल जाती है।
- ट्रायबल: कोई भी मजिस्ट्रेट।
- समझौता योग्य (Compoundable): पीड़ित व्यक्ति (जिसको चोट पहुँची) बिना अदालत की अनुमति के समझौता कर सकता है (BNSS धारा 359)। समझौते पर आरोपी बरी हो जाता है।
यह अपेक्षाकृत हल्का अपराध माना जाता है।
IPC 323 और BNS 115(2) में अंतर
| पहलू | IPC 323 (पुराना) | BNS 115(2) (नया) |
|---|---|---|
| सजा (कारावास) | 1 वर्ष तक | 1 वर्ष तक (समान) |
| जुर्माना | ₹1,000 तक | ₹10,000 तक (बढ़ाया गया) |
| वर्गीकरण | असंज्ञेय, जमानतीय | असंज्ञेय, जमानतीय (समान) |
| समझौता | हाँ | हाँ (समान) |
| लागू तिथि | 1 जुलाई 2024 से पहले | 1 जुलाई 2024 से |
मुख्य बदलाव सिर्फ जुर्माने की अधिकतम सीमा बढ़ाने का है। परिभाषा और अन्य प्रक्रियाएँ लगभग समान हैं।
व्यावहारिक उदाहरण
- दो पड़ोसियों में बहस हुई। एक ने दूसरे को मुक्का मारा, नाक से खून बह गया। चोट साधारण है → 115(2) BNS लागू हो सकती है।
- सड़क पर झगड़े में धक्का-मुक्की से हल्का चोट लगना → अक्सर यही धारा लगती है।
- अगर हड्डी टूट जाए या स्थायी नुकसान हो → गंभीर चोट (धारा 116/117) लग सकती है, सजा ज्यादा।
पुलिस कब लगाती है और प्रक्रिया क्या है?
पुलिस चोट की प्रकृति (मेडिकल रिपोर्ट), इरादा और परिस्थितियाँ देखकर धारा तय करती है। असंज्ञेय होने के कारण आमतौर पर शिकायतकर्ता को मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करानी पड़ती है। FIR सीधे नहीं लिखी जाती, जब तक मजिस्ट्रेट आदेश न दे।
अगर FIR हो जाए तो:
- जमानत आसानी से मिल जाती है।
- समझौता (compounding) संभव है।
- सबूत: मेडिकल रिपोर्ट, गवाह, वीडियो आदि महत्वपूर्ण होते हैं।
बचाव के संभावित आधार (सामान्य जानकारी)
- इरादा या ज्ञान न होना।
- आत्मरक्षा।
- उकसावे (provocation)।
- चोट न लगना या साधारण न होना।
- झूठा आरोप।
नोट: यह सामान्य जानकारी है। हर केस अलग होता है। व्यक्तिगत सलाह के लिए योग्य वकील से संपर्क करें।
आम गलतफहमियाँ
- “हल्की मारपीट पर भी जेल हो जाएगी” → जरूरी नहीं; जमानत मिलती है और समझौता संभव है।
- “पुलिस तुरंत गिरफ्तार कर लेगी” → असंज्ञेय होने से बिना आदेश के आमतौर पर नहीं।
- “IPC और BNS एकदम अलग हैं” → इस धारा में मुख्य बदलाव जुर्माने का है।
BNS Section 115: निष्कर्ष – आज ही यह गाइड बचाएँ
धारा 115 BNS आपको जानबूझकर चोट पहुँचाने के नियम और सजा के बारे में पूरी जानकारी देती है। चाहे आप शिकायतकर्ता हों या आरोपी – यह गाइड आपको सही समझ देगी।
अंतिम सलाह:
- हर घटना के बाद मेडिकल रिपोर्ट बनाएँ।
- परिवार को साथ रखें।
- वकील से सलाह लें।
यह गाइड सिर्फ जानकारी के लिए है – कानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए तुरंत वकील से संपर्क करें।
FAQs
115(2) BNS क्या है?
स्वेच्छा से साधारण चोट पहुँचाने की सजा की धारा।
सजा कितनी है?
1 वर्ष तक कारावास या ₹10,000 तक जुर्माना या दोनों।
जमानत मिलती है?
हाँ, जमानतीय अपराध है।
क्या समझौता हो सकता है?
हाँ, पीड़ित के साथ बिना अदालत अनुमति के।
IPC 323 अब क्या है?
BNS 115(2)।
गंभीर चोट पर क्या लगेगा?
धारा 117 या 118 (खतरनाक हथियार से)।
क्या मेडिकल रिपोर्ट जरूरी है?
हाँ, चोट साबित करने के लिए महत्वपूर्ण।
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